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Electricity21 July 2026· updated 21 August 2026

बिजली विभाग को शिकायत पत्र कैसे लिखें? फॉर्मेट + CGRF शिकायत 2026

बिजली विभाग को शिकायत पत्र का तैयार फॉर्मेट — कॉपी कीजिए और भर लीजिए। बिल ज्यादा आने, मीटर खराब या कनेक्शन कटने पर CGRF को शिकायत कैसे भेजें, और State Electricity Ombudsman तक कैसे जाएँ।

बिजली विभाग को शिकायत पत्र कैसे लिखें?

बिजली विभाग को शिकायत पत्र सबसे पहले अपने DISCOM के Consumer Grievance Redressal Forum (CGRF) को लिखित में भेजें — Electricity Act, 2003 की Section 42(5) के तहत हर बिजली कंपनी को यह फोरम बनाना पड़ता है। CGRF से समाधान न मिले तो State Electricity Ombudsman (Section 42(6)) के पास जाएँ। पैसे की भरपाई के लिए District Consumer Commission — e-jagriti.gov.in पर, ₹5 लाख तक के दावे पर कोई कोर्ट फीस नहीं, और समय-सीमा 2 साल।

नीचे शिकायत पत्र का तैयार फॉर्मेट दिया गया है — कॉपी करके अपनी जानकारी भर लीजिए, प्रिंट कीजिए या PDF के रूप में सेव कर लीजिए।

कहाँ शिकायत करें कब फीस समय-सीमा
DISCOM / CGRF सबसे पहला कदम — लिखित शिकायत कोई फीस नहीं राज्य के Supply Code के अनुसार
State Electricity Ombudsman CGRF के फैसले से असंतुष्ट, या तय समय में फैसला न मिले कोई फीस नहीं CGRF आदेश के बाद, राज्य के नियमानुसार
District Consumer Commission (e-jagriti.gov.in) रिफंड / मुआवज़े के लिए — CGRF जाना अनिवार्य नहीं ₹5 लाख तक NIL घटना से 2 साल (Section 69, CPA 2019)

बिजली विभाग को शिकायत पत्र का फॉर्मेट

यह पूरा फॉर्मेट कॉपी कीजिए, चौकोर कोष्ठक [ ] वाली जगहों पर अपनी जानकारी भरिए, और प्रिंट करके या PDF बनाकर भेज दीजिए।

[आपका नाम]
[आपका पता]
[शहर, पिन कोड]
[मोबाइल नंबर]
[ईमेल — अगर हो]

दिनांक: [आज की तारीख]

सेवा में,
[DISCOM का नाम — जैसे MSEDCL / BESCOM / BSES / UPPCL]
Consumer Grievance Redressal Forum (CGRF)
[CGRF का पूरा पता — अपनी बिजली कंपनी की वेबसाइट से लें]

विषय: उपभोक्ता संख्या [Consumer/Account Number] से संबंधित शिकायत

महोदय,

मैं [आपका नाम], निवासी [पता], आपकी कंपनी का बिजली उपभोक्ता हूँ।
मेरी उपभोक्ता संख्या [Consumer Number] है।

शिकायत का विवरण:

[नीचे दिए तीन विकल्पों में से अपनी समस्या वाला विकल्प चुनकर लिखिए]

विकल्प 1 — बिल ज्यादा आना:
"[महीने] के बिल में ₹[राशि] का चार्ज लगाया गया है, जो असामान्य है।
पिछले [3–6] महीनों में मेरा औसत बिल ₹[पिछली राशि] रहा है। इस महीने
बिजली की खपत सामान्य ही थी। मुझे आशंका है कि रीडिंग गलत दर्ज हुई है
या मीटर ठीक से काम नहीं कर रहा। मैं बिल की जाँच और संशोधन की माँग
करता/करती हूँ।"

विकल्प 2 — मीटर खराब या तेज चलना:
"मेरे मीटर (संख्या: [मीटर नंबर]) को लेकर मुझे संदेह है। पिछले [3–6]
महीनों में मेरी खपत में कोई बदलाव नहीं हुआ, फिर भी बिल लगातार बढ़ रहा
है। मैं इस मीटर की विधिवत टेस्टिंग की माँग करता/करती हूँ।"

विकल्प 3 — बिना नोटिस कनेक्शन काटना:
"मेरा बिजली कनेक्शन [तारीख] को काट दिया गया, जबकि मुझे इससे पहले कोई
लिखित नोटिस नहीं मिला। Electricity Act, 2003 की Section 56 के
अनुसार कनेक्शन काटने से पहले कम से कम पंद्रह स्पष्ट दिनों का लिखित
नोटिस देना अनिवार्य है। मैं कनेक्शन तुरंत बहाल करने की माँग करता/करती
हूँ।"

मेरी माँग:

1. मेरे बिजली खाते की जाँच कर संशोधित बिल जारी किया जाए।
2. मीटर की टेस्टिंग कराई जाए, और खराब पाए जाने पर नियमानुसार बिल
   संशोधित किया जाए।
3. [कनेक्शन कटने की स्थिति में] कनेक्शन तुरंत बहाल किया जाए।
4. इस शिकायत की पावती (acknowledgement) मुझे दी जाए।

संलग्न दस्तावेज:

- पिछले 6 महीनों के बिजली बिल की प्रतियाँ
- मीटर की फोटो
- पहचान प्रमाण की प्रति
- [अगर हो] कनेक्शन काटने के नोटिस की प्रति

कृपया इस शिकायत को दर्ज कर शीघ्र कार्रवाई करें।

भवदीय,
[हस्ताक्षर]
[नाम]
[दिनांक]

बिजली का बिल ज्यादा आने पर शिकायत पत्र में क्या लिखें?

बिल ज्यादा आने की शिकायत में तीन चीज़ें ज़रूर लिखिए — तभी CGRF उसे गंभीरता से लेता है:

  1. तुलना — पिछले 3–6 महीनों का औसत बिल बनाम इस महीने का बिल, दोनों की रकम साफ़ लिखिए।
  2. खपत में बदलाव न होना — यह बताइए कि घर में कोई नया उपकरण नहीं लगा और उपयोग सामान्य रहा।
  3. साफ़ माँग — "बिल की जाँच कर संशोधित बिल जारी किया जाए" — सिर्फ़ शिकायत नहीं, स्पष्ट माँग लिखिए।

बिल ज्यादा आने की सबसे आम वजहें रहती हैं: रीडिंग गलत दर्ज होना, पिछले महीने की बकाया रीडिंग इस महीने जुड़ जाना, अनुमानित (average) बिलिंग, या मीटर में गड़बड़ी।

विद्युत विभाग को शिकायत पत्र कहाँ भेजें?

शिकायत पत्र तीन तरीक़ों से भेजा जा सकता है — और तीनों में सबूत रखना सबसे ज़रूरी है:

  1. रजिस्टर्ड पोस्ट / कूरियर — CGRF कार्यालय के पते पर। रसीद संभालकर रखिए।
  2. ईमेल — DISCOM की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई CGRF ईमेल आईडी पर। भेजा हुआ मेल सेव रखिए।
  3. खुद जाकर — CGRF कार्यालय में जमा कीजिए और पावती (receipt) ज़रूर लीजिए।

CGRF का पता कैसे खोजें? अपनी बिजली कंपनी (MSEDCL, BESCOM, BSES, Adani Electricity, Tata Power, UPPCL, TANGEDCO आदि) की आधिकारिक वेबसाइट पर "Consumer Grievance" या "CGRF" सेक्शन देखिए — वहाँ आपके क्षेत्र के फोरम का पता, फोन नंबर और ईमेल दिया होता है। पते राज्य और मंडल के हिसाब से अलग होते हैं, इसलिए हमेशा अपनी कंपनी की वेबसाइट से ही लीजिए।

बिल विवाद में क्या कनेक्शन काटा जा सकता है?

यह वह अधिकार है जिसकी जानकारी सबसे कम लोगों को होती है।

अगर बिल को लेकर आपका सचमुच विवाद है, तो Electricity Act, 2003 की Section 56 के परंतुक (proviso) के तहत आपकी बिजली नहीं काटी जा सकती — बशर्ते आप "under protest" इतनी रकम जमा कर दें जो इन दोनों में से कम हो:

  • जितनी रकम DISCOM माँग रहा है, या
  • पिछले छह महीनों में चुकाए गए आपके औसत मासिक बिल के बराबर रकम

यह जमा विवाद का निपटारा होने तक आपकी सुरक्षा है। रसीद पर "under protest" लिखवाना न भूलिए — यही आपका सबूत है कि आपने रकम विवाद के बावजूद, अधिकार सुरक्षित रखते हुए जमा की।

इसके अलावा Section 56 के अनुसार कनेक्शन काटने से पहले कम से कम पंद्रह स्पष्ट दिनों का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। बिना नोटिस काटा गया कनेक्शन नियमों के विरुद्ध है।

और Section 56 के अनुसार, कोई भी बकाया रकम पहली बार देय होने की तारीख से दो साल बाद वसूली योग्य नहीं रहती — जब तक कि उसे लगातार बिल में बकाया के रूप में दिखाया न गया हो। पुराना बकाया अचानक जोड़ दिया जाए तो यह बात ज़रूर उठाइए।

मीटर खराब लगे तो क्या करें?

अगर आपको लगता है कि मीटर तेज चल रहा है, तो लिखित अनुरोध देकर मीटर टेस्टिंग करवाइए।

ज़्यादातर राज्यों के Electricity Supply Code में लिखित अनुरोध के बाद एक तय समय-सीमा के भीतर मीटर टेस्टिंग का अधिकार दिया गया है, और मीटर खराब पाए जाने पर बिल को पिछले बिलिंग चक्रों की औसत खपत के आधार पर संशोधित किया जाता है। समय-सीमा, टेस्टिंग शुल्क और संशोधन की अवधि हर राज्य में अलग-अलग है — अपने राज्य के Supply Code या DISCOM की वेबसाइट पर सही नियम देख लीजिए।

टेस्टिंग का अनुरोध हमेशा लिखित दीजिए और पावती लीजिए। मौखिक शिकायत का कोई रिकॉर्ड नहीं बनता।

CGRF से फैसला न मिले तो आगे क्या?

State Electricity Ombudsman — Electricity Act, 2003 की Section 42(6) के तहत हर राज्य में विद्युत लोकपाल नियुक्त होता है। अगर CGRF का फैसला आपके पक्ष में न हो, या तय समय में फैसला ही न आए, तो आप लोकपाल के पास जा सकते हैं। लोकपाल पूरा मामला दोबारा सुनता है और CGRF के आदेश में बदलाव कर सकता है। लोकपाल का पता अपने राज्य के विद्युत नियामक आयोग (जैसे महाराष्ट्र में MERC, कर्नाटक में KERC, तमिलनाडु में TNERC) की वेबसाइट पर मिलेगा।

District Consumer Commission — अगर आपको सीधे रिफंड या मुआवज़ा चाहिए, तो Consumer Protection Act, 2019 की Section 35 के तहत जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए पहले CGRF जाना अनिवार्य नहीं है।

  • फीस: ₹5 लाख तक के दावे पर कोई कोर्ट फीस नहीं
  • समय-सीमा: घटना से 2 साल के भीतर (Section 69, CPA 2019)
  • कहाँ दाखिल करें: https://e-jagriti.gov.in पर ऑनलाइन, या अपने जिले के उपभोक्ता आयोग कार्यालय में

गलत बिल या खराब मीटर Consumer Protection Act, 2019 की Section 2(11) के अनुसार "deficiency in service" मानी जाती है, जिसके आधार पर आप अधिक वसूली गई रकम की वापसी और हुई परेशानी के लिए मुआवज़े की माँग कर सकते हैं। मुआवज़े की रकम आयोग मामले के तथ्यों के आधार पर तय करता है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 (https://consumerhelpline.gov.in) पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

शिकायत पत्र के साथ कौन-से दस्तावेज लगाएँ?

  1. पिछले 6–12 महीनों के बिजली बिल की प्रतियाँ
  2. पहचान प्रमाण (आधार / PAN) की प्रति
  3. मीटर की फोटो — जिसमें मीटर संख्या और रीडिंग दिखे
  4. कनेक्शन से जुड़े दस्तावेज — agreement, sanctioned load आदि
  5. पहले की गई किसी शिकायत की प्रति या शिकायत संख्या
  6. कनेक्शन काटने के नोटिस की प्रति, अगर मिला हो
  7. फोन पर हुई बातचीत का कोई लिखित रिकॉर्ड — तारीख, समय, शिकायत संख्या

अगला कदम: Nyaykar से मुफ़्त शिकायत पत्र बनवाइए

ऊपर दिए फॉर्मेट से लिखने में झिझक हो रही है, या अपने मामले के हिसाब से विस्तृत पत्र चाहिए? Nyaykar पर अपनी जानकारी भरिए — आपके मामले के अनुसार तैयार शिकायत पत्र बन जाएगा, बिल्कुल मुफ़्त।

Nyaykar से मुफ़्त बिजली शिकायत पत्र बनाएँ

आखिरी बातें

  1. हर चीज़ लिखित में रखिए — ईमेल, नोटिस, रसीद, पावती। मौखिक शिकायत का कोई रिकॉर्ड नहीं बनता।
  2. शिकायत संख्या ज़रूर लीजिए — आगे हर कदम पर यही आपका सबूत है।
  3. समय-सीमा का ध्यान रखिए — उपभोक्ता आयोग में शिकायत के लिए 2 साल की सीमा है।
  4. आगे बढ़ने से मत हिचकिए — CGRF या लोकपाल से संतोष न मिले तो जिला उपभोक्ता आयोग आपका अधिकार है।
  5. अपनी भाषा में लिखिए — हिंदी, अंग्रेजी या अपनी क्षेत्रीय भाषा, कोई फर्क नहीं पड़ता।

यह आपका अधिकार है। DISCOM से लिखित जवाब माँगिए।

Disclaimer: Nyaykar is not a law firm and this article is AI-assisted guidance, not legal advice. Verify all details and current rules before acting. For complex matters, consult a qualified consumer advocate.

Frequently asked questions

CGRF को शिकायत का फैसला कितने दिन में देना पड़ता है?
CGRF की समय-सीमा राज्य विद्युत नियामक आयोग के नियमों (State Electricity Supply Code / CGRF Regulations) में तय होती है और हर राज्य में अलग-अलग है — अपने राज्य के नियम या DISCOM की वेबसाइट पर देख लीजिए। Electricity Act, 2003 की Section 42(5) सिर्फ यह कहती है कि हर DISCOM को CGRF बनाना पड़ेगा; उसमें फैसले की समय-सीमा नहीं दी गई। तय समय में फैसला न मिले तो Section 42(6) के तहत State Electricity Ombudsman के पास जा सकते हैं।
अगर CGRF मेरे पक्ष में फैसला न दे तो क्या करूँ?
आप State Electricity Ombudsman के पास अपील कर सकते हैं, जो Electricity Act, 2003 की Section 42(6) के तहत नियुक्त होता है और CGRF के आदेश में बदलाव कर सकता है। इसके समानांतर, रिफंड या मुआवज़े के लिए Consumer Protection Act, 2019 की Section 35 के तहत जिला उपभोक्ता आयोग में भी शिकायत दाखिल कर सकते हैं।
क्या बिजली विभाग को शिकायत भेजने की कोई फीस लगती है?
नहीं। CGRF और State Electricity Ombudsman, दोनों को शिकायत देने के लिए कोई फीस नहीं लगती। जिला उपभोक्ता आयोग में ₹5 लाख तक के दावे पर कोई कोर्ट फीस नहीं है; इससे अधिक के दावों पर निर्धारित फीस लगती है।
बिना नोटिस कनेक्शन काट दिया गया — क्या यह गलत है?
हाँ। Electricity Act, 2003 की Section 56 के अनुसार कनेक्शन काटने से पहले कम से कम पंद्रह स्पष्ट दिनों का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। बिना नोटिस काटा गया कनेक्शन नियमों के विरुद्ध है और आप तुरंत बहाली की माँग कर सकते हैं।
बिल विवाद में बिजली कटने से कैसे बचाएँ?
Electricity Act, 2003 की Section 56 के परंतुक के अनुसार, विवाद का निपटारा होने तक आपकी बिजली नहीं काटी जा सकती — बशर्ते आप "under protest" इतनी रकम जमा कर दें जो DISCOM की माँगी गई रकम और पिछले छह महीनों के औसत मासिक बिल, इन दोनों में से कम हो। रसीद पर "under protest" ज़रूर लिखवाइए, यही आपका सबूत है।
मीटर टेस्टिंग कैसे करवाएँ और उसमें कितना खर्च आता है?
मीटर टेस्टिंग के लिए अपने DISCOM को लिखित अनुरोध दीजिए और पावती लीजिए। टेस्टिंग की समय-सीमा और शुल्क हर राज्य के Electricity Supply Code तथा नियामक आयोग के आदेशों में अलग-अलग तय होते हैं — सही राशि अपने DISCOM की वेबसाइट या Supply Code से देख लीजिए। मीटर खराब पाए जाने पर बिल नियमानुसार संशोधित किया जाता है।
क्या मैं सीधे जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर सकता हूँ?
हाँ। Consumer Protection Act, 2019 की Section 35 के तहत आप सीधे जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल कर सकते हैं; पहले CGRF जाना अनिवार्य नहीं है। ₹5 लाख तक के दावे पर कोई कोर्ट फीस नहीं लगती और शिकायत घटना से 2 साल के भीतर दाखिल करनी होती है (Section 69, CPA 2019)। ऑनलाइन दाखिल करने के लिए https://e-jagriti.gov.in पर जाइए।
क्या बिजली विभाग बहुत पुराना बकाया अचानक जोड़ सकता है?
Electricity Act, 2003 की Section 56 के अनुसार कोई भी बकाया रकम पहली बार देय होने की तारीख से दो साल बाद वसूली योग्य नहीं रहती, जब तक कि उसे लगातार बिल में बकाया के रूप में दिखाया न गया हो। अगर पुराना बकाया अचानक जोड़ दिया गया है, तो शिकायत में यह बात स्पष्ट रूप से उठाइए।

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Disclaimer: This article is for guidance only. Nyaykar.in is not a law firm. Verify details before acting on this information. For complex matters, consult a qualified consumer advocate.